कॉपीराइट कानून क्या है ?
मेहनत कोई और करे और उसका लाभ किसी और को मिले... ऐसे मामले में मेहनत करने वाले के साथ अन्याय होता है, जिसको या तो समाज न्याय करता है या फिर उस देश का कानून... मेहनत कई प्रकार की होती है, शारीरिक मेहनत को आम जीवन में ज्यादा तवज्जो दी जाती है, लेकिन उस मेहनत की भूमिका वास्तव में व्यक्ति के मस्तिष्क में तैयार होती है... मेहनत का परिणाम कोई निर्माण हो सकता है, कोई संगीत हो सकता है, कोई पुस्तक हो सकती है... या फिर कोई अविष्कार हो सकता है... ऐसी चीजों होने वाली आय पर पहला अधिकार उनके रचनाकार का होता है... अगर कोई रचनाकार की सहमति के बिना उसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करता है तो ये एक प्रकार का क्राइम होता है... इस क्राइम को रोकने के लिए ही कॉपीराइट कानून बनाया गया है...
आज हम भारत और विश्व में कॉपीराइट कानून के विषय में जानेंगे...
कॉपीराइट कानून के विषय में इस प्रकार समझा जा सकता है... जब भी कोई व्यक्ति अपने दिमाग में आए विचार को किसी अनोखी रचना का रूप देता है, ऐसी खोज करने से वह व्यक्ति रचनाकार या खोजकर्ता या उसका जन्मदाता माना जाता है, उस रचना पर पहला अधिकार उसी का होता है, या उस रचना से प्राप्त आय पर भी केवल उसी का अधिकार होता है... उस रचना पर कोई और ना अधिकार कर ले या उससे कोई अपने फायदे के लिए इस्तेमाल ना करे, इसके लिए कॉपीराइट कानून बनाया गया है... किसी भी कॉपीराइट कानून का उल्लंघन करना भारी पड़ सकता है...
कॉपीराइट क्या है...?
कॉपीराइट कोई वंशानुगत अधिकार नहीं है. कॉपीराइट कानून द्वारा संरक्षित किया गया है...!
सबसे पहले 1662 में ब्रिटिश संसद में लाइसेंसिंग और प्रेस एक्ट पारित किया गया, जिसमें प्रिंटिंग प्रेस और मशीनों के विकास का अधिकार उनके निर्माताओं तक सीमित किया गया. धीरे धीरे ये कानून अपने विभिन्न रूपों में अलग अलग देशों में प्रसारित हुआ... पहले पहले ये कानून सिर्फ एक देश तक ही सीमित था, उस देश के बाहर किसी कॉपीराइट वाली रचना का इस्तेमाल कोई भी कर सकता था, उसका इस्तेमाल अपने व्यापार के लिए कर सकता था... धीरे धीरे इस कॉपीराइट कानून की आवश्यकता सभी देशों को होने लगी और अपने हितों की रक्षा के लिए दूसरे देश में भी इस किसी कॉपीराइट कानून को मानने के लिए संधियां होने लगी... इन संधियों को कानून में स्थान दिया जाने लगा... आज विश्व के सभी देश कॉपीराइट कानून को मानते हैं, और उसके लिए कानून बनाए गए हैं...!
भारत में कॉपीराइट कानून
भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1947, 1947 में भारत में कॉपीराइट कानून की शुरुआत हुई, ये कानून ब्रिटिश कानून को कॉपी करके बनाया गया था, इसके बाद भारत में नए कानून की जरूरत महसूस होने लगी और 1957 में भारतीय संसद ने एक नया कॉपीराइट कानून 1957 पास किया... जिसमें समय समय बदलाव किए गए... कॉपीराइट किसी भी रचना के पहले उत्पादन या प्रथम संस्करण के साथ शुरू हो जाता है, इसके लिए पंजीकरण की आवश्यकता होती है, ताकि उस रचना पर किसका अधिकार है, उसका पता चल सके... भारत में कॉपीराइट के रजिस्ट्रेशन के लिए कार्यालय सिर्फ नई दिल्ली ने है, किसी भी रचना पर पहला अधिकार उसके रचनाकार का ही होता है, लेकिन उस रचना जन्म किसी व्यक्ति द्वारा किसी कंपनी के साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ उसकी शर्तों के तहत काम करते समय हुआ है तो उस रचना पर अधिकार उस कंपनी का या उस व्यक्ति का होता है, जिसके साथ काम करते हुए उस रचना का जन्म हुआ है.
किसी भी रचना पर कॉपीराइट कानून उस रचना के रचनाकार की मृत्यु के 60 वर्ष तक प्रभावी रहता है, 60 वर्ष की अवधि के बाद वो रचना सार्वजनिक इस्तेमाल में ली जा सकती है... कॉपीराइट का अधिकार कोक व्यक्ति अगर छोड़ना चाहे तो कॉपीराइट कार्यालय में नोटिस देकर छोड़ सकता है...!
कॉपीराइट एक संपति की तरह है, जिसका मालिक उसे किसी अन्य को स्थानांतरित कर सकता है, उसके प्रयोग के लिए दूसरों को लाइसेंस दे सकता है... या अपने कॉपीराइट की वसीयत कर सकता है... जो स्वामी की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों को मिल जाता है...!
उल्लंघन
किसी रचना का किसी अन्य भाषा में अनुवाद करना, उसका अपने हित के लिए प्रदर्शन करना... उसका प्रचार करना, उसपर मालिक की सहमति के बगैर फिल्म बनाना या उस रचना के माध्यम से लाभ प्राप्त करना आदि इसके उल्लंघन की श्रेणी में आता है...!
दण्ड
कॉपीराइट के मामलों में या उसके उल्लंघन होने पर उल्लंघनकर्ता से उसका हर्जाना लेने के लिए या उसे दंडित करने के लिए भरता में कानून बनाए गए हैं...! कॉपीराइट के उल्लंघन के आरोप के सिद्ध हो जाने पर आरोपी को 3 वर्ष की की सजा या साथ जुर्माना या दोनों हो सकते हैं...!
कई मामलों में किसी रचना के कॉपीराइट के प्रयोग को उल्लंघन नहीं माना जाता है, जैसे किसी रचना की आलोचना करना, उसका रिव्यू करना आदि उल्लंघन नहीं माना जाता है...!
रॉयल्टी
2012 में रॉयल्टी कानून पास हुआ कॉपीराइट एक्ट में संशोधन और रचनाकार को जीवन भर किसी रचना की रॉयल्टी मिलती रहे, इसकी व्यवस्था की गई...!
कॉपीराइट कानून एक ऐसा कानून है, जो इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को सुरक्षा प्रदान करता है... इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी वो प्रॉपर्टी होती है, जिसे हम छू नहीं सकते, जैसे... कोई संगीत, कोई गाना, फिल्म, वीडियो या कोई लेख आदि... ये सब इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज कहलाती है...!
ये थी जानकारी कॉपीराइट संबंधी कानून पर... आपको कैसी लगी... कमेंट करके बताइए जरूर...!

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